JNU की कहानी
एक गरीब का बच्चा JNU आता है, वो वहाँ BA करता है फिर MA करता है, फिर डबल MA करता है, फिर MPhil करता है, फिर पीएचडी करता है, मगर वो गरीब का बच्चा ही बना रहता है,
फिर वो JNU में ही एक गरीब की बच्ची से शादी भी कर लेता है और दोनो वहीं एक कमरा घेर कर मुफ्त में जीवन भी बसर करने लगते है, खास बात यह है कि उसके खाने रहने का खर्चा हम आप उठाते है, मगर वो गरीब का बच्चा ही बना रहता है, वो किसी देश तोड़क NGO से जुड़ जाता है जिसका संस्थापक उसका कोई अध्यापक ही होता है, वहाँ से वो धरना प्रदर्शन करने की मोटी रकम पाता है मगर वो गरीब का बच्चा ही बना रहता है, वो गरीब का बच्चा चाहता है कि उसकी कोई हाज़िरी न पूछे, उससे खाने रहने के पैसे न मांगे, उससे न पूछे कि रात बेरात वो कहाँ घूम रहा है, क्योंकि वो JNU में पढ़ रहा एक गरीब का बच्चा है
तो मुफ्तखोरों अब तुम्हारे दिन लद गय
0 Comments
Please do not enter any spam link in the comment box