इंडिया टुडे व् आजतक की पत्रकार JNU के प्रदर्शनकारियों को कैमरे के आगे क्या बोलना है वह सिखाती हुई वीडियो में पकड़ी गई
आजतक व् इंडिया टुडे को किरान्तिकारी मीडिया ऐसे ही नही कहा जाता है, आखिर JNU के नशेड़ी रिबेल विदाउट आ कॉज़ पेशेवर प्रदर्शनकारियों को बकायदा मीडिया कैमरों के आगे नौटँकी की ट्रेनिंग देना कोई आम बात थोड़े ही है....
वैसे इंडिया टुडे सदैव से ही ऐसी फिक्सड नौटँकीयाँ करता रहता है:-
आपको याद होगा कुछ समय पहले दिल्ली में वो मानव खोपड़ी लेकर प्रदर्शन की नौटँकी करने मोटी मोटी तोन्दों वाले गले मे सोने की मोटी चेन पहने वामपंथी ब्रीड के किसान फ्लाइट से आये थे जिनका खाना शहर के महंगे दक्षिण भारतीय रेस्त्रां से आता था,
जो कह रहे थे ये खोपड़ियां उनके गांव के किसानों की है जिन्होंने बेहाली में प्राण त्यागे, फिर जब पूछा कि कौन सी एयरलाइंस मानव खोपड़ी हैंड बैगेज व् चेक इन में ले जाने देती है तो बाद में पता चला कि इंडिया टुडे ने ही प्लास्टिक की खोपड़ियां उपलब्ध करवाकर नोयडा के निकट एक गांव में बकायदा उनका फोटोशूट कर प्रचारित प्रसारित किया था
इसी इंडिया टुडे का पत्रकार ऑन कैमरा एक लड़के को दारु और पैसे देकर भाजपा नेता के विरुद्ध नौटँकी करने को कहता हुआ पकड़ा गया था
केजरीवाल का क्रांतिकारी फिक्स्ड इन्टरव्यू भी इसी इंडिया टुडे ग्रुप ने चलवाया था, जिसमे केजरीबवाल साहब आदेश दे रहे थे कि कौन सा पोर्शन अधिक चलाना है
भारत के टुकड़े करने के नारे लगाने वाले कन्हैय्या को इसी इंडिया टुडे के एंकर राहुल कंवल इंटरव्यू में दुलारते हुए दिखे थे, और शांतिपूर्ण तरीके से हनुमान चालीसा गाकर विरोध करने वाले BHU के छात्रों को यही इंडिया टुडे के राहुल कंवल डांटते डपटते हुए धमकाते हुए और उन्हें निष्कासित करने की सिफारिश करते दिखे थे
यही इंडिया टुडे के राहुल कंवल थे जो वंदे मातरम के नारे को लाइव टीवी पर देश विरोधी व् एंटी नेशनल गतिविधि बता रहे थे
इसी इंडिया टुडे की पत्रकार मौसमी सिंह प्रयागराज में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जमा कर उन्हें लगाने के लिए नारे बताते हुए और कैमरे पर क्या बोलना है सिखाते हुए पकड़ी गई थी
अभी हाल ही में इंडिया टुडे व् राहुल कंवल का ABVP के विरुद्ध किया गया फर्जी स्टिंग भी आप सबने देखा ही होगा जिसमे लेफ्ट के लड़के को ABVP का बताकर कैसे वास्तविक अपराधी लेफ्ट को निर्दोष बताकर पीड़ित ABVP को ही अपराधी सिद्ध करने का गंदा प्रयत्न किया था।
और अब ये नौटँकी जिसमे इंडिया टुडे की ग्राउंड रिपोर्टर ही प्रदर्शनकारी को सिखा व् रटा रही है कि उन्हें कैमरे पर क्या बोलना है, यह सुपारी जर्नलिज़्म का उत्कृष्ट उदाहरण है।
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