अमेरिका में कोरोना को हराने वाले भारतीय मूल के प्रमोद भगत की कहानी ग़ज़ब है और हमें आइना दिखाती है कि हम अपनी खुद सांस्कृतिक विरासत को कितना कम महत्व देते हैं।

अमेरिका में कोरोना को हराने वाले भारतीय मूल के प्रमोद भगत की कहानी ग़ज़ब है और हमें आइना दिखाती है कि हम अपनी खुद सांस्कृतिक विरासत को कितना कम महत्व देते हैं। 



अमेरिका में कोरोना को हराने वाले भारतीय मूल के प्रमोद भगत की कहानी ग़ज़ब है और हमें आइना दिखाती है कि हम अपनी खुद सांस्कृतिक विरासत को कितना कम महत्व देते हैं। आज जब हम सामान्य खांसी के लिए दवाइयों पर निर्भर हैं तब उन्होंने आयुर्वेदिक घरेलू उपचार और योग क्रिया से कोरोना को हराया।

कोरोना की रिपोर्ट आते ही भगत ने कुंजल क्रिया कर पहले अपने शरीर को डीटाक्स किया और फिर पूरी तरह घरेलू उपचार पर चले गए। गिलोय, तुलसी, हल्दी आदि का उपयोग, देसी काढ़े और साथ साथ इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए योग क्रियाएँ। आज उन्होंने कोरोना को हराया और एक उदाहरण पेश किया दुनिया भर में।

सभी को पता है कि कोरोना का कोई इलाज नहीं है और रोग प्रतिरोधक क्षमता ही हमें बचा सकती है। ऐसे में भारत सरकार क्यूँ नहीं ज़ोर देती आयुर्वेद के प्रचार और प्रसार पर। कोरोना प्रभावित क्षेत्रों में गिलोय बँटवाया जाए, योग के लिए प्रेरित किया जाए। रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर है।

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