पाताल लोक’ , बॉलीवुड की फिल्मो व एक और वेब सीरीज के माध्यम से हिंदुओं के खिलाफ रचा गया बड़ा षडयंत्र...


‘पाताल लोक’ , बॉलीवुड की फिल्मो व एक और वेब सीरीज के माध्यम से हिंदुओं के खिलाफ रचा गया बड़ा षडयंत्र...


अमेजन प्राइम पर आए वीडियो सीरीज ‘पाताल लोक’ की, जिसमें हिन्दू-घृणा कूट-कूट कर भरी हुई है। अगर कथित सवर्णों के प्रति घृणा को भी जोड़ दें तो ‘पाताल लोक’ कई अवॉर्ड्स जीत सकती है।

आख़िर क्या है ‘पाताल लोक’? कहानी आउटर जमुना पार पुलिस स्टेशन की है। यही है पाताल लोक, जहाँ पुलिस अधिकरी पोस्टिंग होने से भागते हैं। शुरू में ही बता दिया जाता है कि कहाँ-कहाँ पोस्टिंग होना स्वर्ग लोक के समान है और कहाँ पृथ्वी लोक के सामान। ‘पातल लोक’ का एक बना बनाया सिस्टम है, जो वैसे ही चला आ रहा है। अधिकतर मामलों में केस की जाँच शुरू होने से पहले ही फ़ैसला सुनाया जाता है और फिर परिणाम तक पहुँचा जाता है।

इंस्पेक्टर हाथीराम चौधरी इस सीरीज के मुख्य किरदार हैं, जिसे जयदीप अहलावत ने अदा किया है। हमने उन्हें अक्षय कुमार के ‘गब्बर इज बैक’ में एक जाँच अधिकारी के किरदार में देखा था। उस किरदार में से ग्लैमर हटा कर उसे और ग़रीब बना दिया जाए तो ‘पाताल लोक’ का उनका किरदार बन जाता है। वही मध्यम वर्गीय पुलिस अधिकारी जिसकी बीवी भी रुपए कमाने की जुगत में लगी है, जो अपने बेटे को किसी तरह महँगे स्कूल में पढ़ा रहा है, जिसका सालों से प्रमोशन नहीं हुआ, जिसे पुलिस विभाग में कम बुद्धि वाला माना जाता है।

यहाँ हम कहानी की चर्चा नहीं करेंगे। अनुष्का शर्मा ने इस सीरीज को प्रोड्यूस किया है, जिन्हें सोशल मीडिया पर सितारों की बधाइयों का ताँता लगा हुआ है। जयदीप की एक्टिंग सही में शानदार है। और हाँ, वामपंथ की यही ख़ासियत है कि इनके द्वारा चीजों को इतनी बारीकी से आपके समक्ष पेश किया जाता है कि वो वास्तविकता से भी ज़्यादा वास्तविक लगने लगता है। निर्देशन में मेहनत की जाती है, दृश्यों के बदलने में क्रिएटिविटी दिखाई जाती है- जैसे बंदूक का चलना और अगले ही दृश्य में कैमरे का चमकना।

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वैसे तो ये दृश्य अंतिम एपिसोड में आता है लेकिन इसका जिक्र सबसे पहले करना ज़रूरी है। जब आमिर ख़ान से पूछा गया था कि उन्होंने ‘पीके’ में हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक क्यों बनाया तो उन्होंने जवाब दिया कि ऐसा तो होता है, नसीरुद्दीन शाह की फिल्म ‘जाने भी दो यारों’ में ऐसा हुआ था। बता दें कि उस फ़िल्म के अंतिम दृश्य में महाभारत और अनारकली वाले नाटक को मिक्स कर दिया जाता है। इसी तरह ‘पाताल लोक’ में भी जब इंस्पेक्टर चौधरी भागते रहते हैं तो एक मेले में चल रहे भक्त प्रह्लाद वाले नाटक में पहुँच जाते हैं।

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गुंडे उनका पीछा कर रहे होते हैं, जिनसे भागते-भागते वो स्टेज पर चढ़ जाते हैं। संयोग देखिए कि ठीक उसी समय खम्भे को फाड़ कर हिरण्यकश्यप राक्षस के समक्ष भगवान विष्णु के अवतार नरसिंह प्रकट होते हैं। नरसिंह के किरदार को भागते हुए इंस्पेक्टर चौधरी जोर का धक्का देकर निकल जाते हैं। भगवान नरसिंह सीधा हिरण्यकश्यप के ऊपर गिरते हैं। सोचिए, अगर ऐसा किसी और धर्म या मजहब के ईश्वर के साथ किया गया रहता तो क्या होता ? क्या ये सीरीज रिलीज हो पाती?

निर्देशक फराह खान, अभिनेत्री रवीना टंडन और कॉमेडियन भारती सिंह ने एक शो के दौरान बाइबिल के किसी शब्द को लेकर हल्का सा मजाक कर दिया था तो इतना विरोध हुआ था कि उन तीनों को माफ़ी माँगनी पड़ी थी। इतने पर भी बात नहीं बनीं तो भारत में वेटिकन के आर्कबिशप के पास जाकर लिखित माफ़ीनामा सौंपना पड़ा था। यही सेलेब्रिटीज हिन्दुओं के मामले में ख़ुद के न झुकने का दिखावा करते हुए निडरता का स्वांग भरते हैं। मुसलमानों या ईसाईयों का एक समूह भी विरोध कर दे तो इनकी घिग्घी बँध जाती है।

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‘पाताल लोक’ एक और सन्देश ये देती है कि आप चाहें कितने भी ऊपर चले जाओ, देश आपको मुसलमान होने का एहसास पग-पग पर दिलाता रहेगा। इसके लिए हाथीराम के अंतर्गत काम करने वाले पुलिसकर्मी इमरान अंसारी का किरदार गढ़ा गया है। वो यूपीएससी क्लियर कर लेता है, और काफ़ी सौम्य है। यानी, हर हिसाब से एक अच्छा मुसलमान। जब सीबीआई की महिला अधिकारी को पता चलता है कि इमरान ने यूपीएससी निकाला है तो वो कहती हैं- “आजकल काफ़ी आ रहे हैं न इनके कम्युनिटी से?”

जब वो इंटरव्यू देकर निकलता है तो एक दूसरा प्रतियोगी उस पर तंज कसते हुए कहता है, “अरे तेरा तो हो ही जाएगा। उन लोगों को भी तो रिप्रजेंटेशन दिखानी होती है।” यहाँ तक कि इंटरव्यू लेने वाले भी उसे ‘पॉजिटिव’ होने की सलाह देते हैं, जब उससे मुस्लिम समुदाय के उत्थान को लेकर सवाल पूछा जाता है। उसके सामने हाथीराम कबीर को ‘कटुआ’ कहता है। हाँ, उसका पैंट खोल कर चेक करना होता है कि वो मुसलमान है। बेचारा इमरान! हिंदूवादी सिस्टम के बीच फँसा हुआ है।

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