बिटिया हमारी



कहते हैं बेटे अगर भाग्य से होते हैं तों बेटियां सौभाग्य से होती हैं….अगर बेटे अंश हैं तो बेटीयां वंश हैं..और बेटा आन हैं, तो बेटीयां शान हैं। पर अफसोस हमारे देश में कुछ ऐसे संकीर्ण मानसिकता के लोग हैं जो एक लंबे समय से बेटियों के साथ भेदभाव करते आ रहे हैं। इनकी कट्टर सोच के कारण..बेटियों की अच्छी शिक्षा और परवरिश तो छोड़िए। बेटियां जन्म तक नहीं ले पातीं।

इसीलिए भारत में लिंगानुपात यानी सेक्स रेशियो की स्थिति लगातार बिगड़ती रही। पर आपको भी पता है जड़ों तक जमी इस घटिया सोच को उखाड़ फेंकने में समय लगता है।

बेटियों के चहुमुखी विकास के लिए सरकार हमेशा से अपनी योजनाओं और जागरूकता अभियानों के माध्यम से कार्यरत रही है। सुकन्या समृद्धि, बालिका समृद्धि, लाडली औऱ सरकार की सबसे महत्वकांक्षी यानी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की बदौलत देश के हर राज्य में बेटियों के अनुपात में लगातार सुधार आ रहा है।

विशेष के इस अंक में हम बात करेंगे बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना की, जानेंगे इसके नतीजे और लिंगानुपात में सुधार को, इसके साथ ही जानेंगे बेटियों के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार के कदमों को और बेटियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की पहल को .....

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