भाजपा की हार का एकमात्र कारण है
निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा ....!
एक के बाद एक देश हित में साहसिक निर्णय लेने के बावजूद भी भाजपा राज्यों में लगातार हारती जा रही है !
दिल्ली के चुनावों में तो पार्टी की हार नही बल्कि "शर्मनाक हार" हुई है !
राज्यो में भाजपा की हो रही एक के बाद एक हार का कारण है 'पार्टी के अंदर हो रही निष्ठावान कार्यकर्ताओं उपेक्षा "! जिससे कार्यकर्ताओ में निराशा है ! इस सत्य से इंकार नहीं किया जा सकता कि अब चुनाव समर में भाजपा अपने निष्ठावान कार्यकर्ताओं पर भरोसा न कर चापलूस और पेड वर्करों के भरोसे चुनाव लड़ती है !
एक कटु सत्य यह भी है कि अब पार्टी नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं की आवाज को सुनना बंद कर दिया है !
राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले वसुंधरा राजे को बदलने की बात को पार्टी नेतृत्व ने नही माना जिसके परिणाम सबके सामने है !
हरियाणा में भी प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला और मुख्यमंत्री खट्टर के खिलाफ कार्यकर्ताओं में जबरदस्त आक्रोश था और उन्हें बदलने की माँग उठ रही थी, परंतु राष्ट्रीय नेतृत्व यहाँ भी अपनी जिद पर अड़ा रहा ।
दिल्ली में भी भाजपा के कार्यकर्ताओं द्वारा सुझाए गए सुझावों को पार्टी नेतृत्व ने कदमों तले कुचल दिया जिसका परिणाम सबके सामने है !
अब पार्टी के राष्ट्रीय व प्रादेशिक नेता पार्टी को अपनी जागीर समझने लगे हैं !
पार्टी का नेतृत्व इस बात को भूल गया है कि पार्टी को अर्श तक ले जाने वाला कार्यकर्ता ही होता है ।
आज जरूरत है, अटल बिहारी वाजपेयी के नक्शे कदम पर चल कर कार्यकर्ताओं की बातों को शिरोधार्य कर आगे बढ़ने की, ताकि भाजपा फिर से राज्यों में जीत की ओर बढ़ सके !
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