मेडिकल स्टाफ पर हमले के दोषियों को दंडित करने वाले अध्यादेश को राष्ट्रपति ने दी मंज़ूरी


मेडिकल स्टाफ पर हमले के दोषियों को दंडित करने वाले अध्यादेश को राष्ट्रपति ने दी मंज़ूरी


राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने महामारी कानून-1897 में संशोधन के लिए अध्यादेश को मंज़ूरी दे दी है जिसके तहत डॉक्टरों व आरोग्यकर्मियों पर हमले करना अब गैर-ज़मानती अपराध होगा। इसके तहत 3 महीने-5 साल तक सज़ा व ₹50,000-₹2 लाख जुर्माने का प्रावधान है। गंभीर हमलों के मामले में 6 महीने-7 साल तक सज़ा व ₹1 लाख-₹5 लाख जुर्माने का प्रावधान होगा।


नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रपति रामनाथ 

कोविंद ने कोविड-19 महामारी से लड़ रहे 

स्वास्थ्यकर्मियों पर हिंसा के कृत्यों को संज्ञेय और गैर-

जमानती अपराध बनाने वाले एक अध्यादेश को 

बुधवार को अपनी मंजूरी दी।

महामारी रोग अधिनियम, 1897 में संशोधन करने 

वाला इस अध्यादेश में स्वास्थ्यकर्मियों को पहुंचे जख्म 

तथा संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या उसे नष्ट करने के 

लिए मुआवजे की व्यवस्था की गयी है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘ राष्ट्रपति ने 

इस अध्यादेश की उद्घोषणा के लिए अपनी मंजूरी दे 

दी।’’
अध्यादेश के अनुसार ऐसी हिंसक कृत्य करने या 

उसमें सहयोग करने पर तीन महीने से पांच साल तक 

कैद और 50 हजार से लेकर दो लाख रूपये तक के 

जुर्माने का प्रावधान किया गया है। गंभीर चोट/जख्म 

पहुंचाने पर दोषी को छह माह से लेकर सात साल तक

 कैद की सजा होगी और एक लाख से लेकर पांच 

लाख रूपये तक उस पर जुर्माना लगेगा।

इसके अलावा अपराधी को पीड़ित को मुआवजा 

भरना 

होगा तथा उसे संपत्ति को पहुंचे नुकसान के लिए 

उसके बाजार मूल्य का दोगुणा का भुगतान करना 

होगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महामारी के दौरान स्वास्थ्य 

कर्मियों तथा संपत्ति की रक्षा के लिए महामारी रोग 

(संशोधन) अध्यादेश 2020 की उद्घोषणा को मंजूरी 

दी।
भाषा
राजकुमार उमा

Post a Comment

0 Comments